असम राइफल्स स्थापना दिवस: पूर्वोत्तर के वीर प्रहरीयों को सलाम

 

असम राइफल्स, जिसे "पूर्वोत्तर का प्रहरी" भी कहा जाता है, भारत की सबसे पुरानी अर्धसैनिक बलों में से एक है। इसकी स्थापना 1835 में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी, और तब से यह भारत की सीमाओं की रक्षा करने और पूर्वोत्तर राज्यों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

असम राइफल्स का गौरवशाली इतिहास: असम राइफल्स ने ब्रिटिश काल से लेकर स्वतंत्र भारत तक कई महत्वपूर्ण अभियानों में हिस्सा लिया। इस बल ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने, उग्रवाद से निपटने और आपदा प्रबंधन में अपनी अद्वितीय क्षमता साबित की है।

इसकी कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ इस प्रकार हैं:

     पूर्वोत्तर राज्यों में आंतरिक सुरक्षा और शांति स्थापना

     सीमा पार घुसपैठ और आतंकवाद पर प्रभावी नियंत्रण

     आपदा प्रबंधन और जरूरतमंदों की सहायता

     सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों और शिक्षा को बढ़ावा

वीर जवानों का बलिदान और योगदान: असम राइफल्स के जवान हमेशा कर्तव्यनिष्ठा, साहस और बलिदान के लिए जाने जाते हैं। ये सैनिक कठिन परिस्थितियों में भी देश की सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं और कई बार अपने प्राणों की आहुति तक दे चुके हैं।

हम उन सभी वीर सैनिकों को नमन करते हैं जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा की। उनका बलिदान कभी भुलाया नहीं जाएगा, और उनकी बहादुरी हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

जनता के लिए मित्रवत भूमिका : असम राइफल्स सिर्फ सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि जनता के सच्चे साथी भी हैं।

पूर्वोत्तर के कई दूरदराज के इलाकों में मेडिकल कैंप, शिक्षा, और बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने में इनकी अहम भूमिका रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल, सड़कों और पुलों के निर्माण में भी इस बल का योगदान सराहनीय है।

स्थानीय युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण देने के लिए असम राइफल्स ने कई प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं।

स्थापना दिवस पर विशेष आयोजन : असम राइफल्स के स्थापना दिवस के अवसर पर पूरे देश में कई सांस्कृतिक और सैन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इस दिन, असम राइफल्स के जवानों को उनकी बहादुरी, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान के लिए सम्मानित किया जाता है।

 

 

 

 

 

 

 

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